सिपाही गुरतेज सिंह की शौर्यगाथा – बलिदान होने से पूर्व एक दर्जन चीनी जवानों के प्राण लेने वाला दशम गुरु गोबिंद सिंह जी का सच्चा सिक्ख।

बलिदान होने से पूर्व एक दर्जन चीनी जवानों के प्राण लेने वाला दशम गुरु गोबिंद सिंह जी का सच्चा सिक्ख।

 15 जून को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा  (एलएसी) पर चीनी सेना के साथ टकराव हिंसक हो गया था। भारतीय सेना के बहादुरों ने चीनी सेना को मुंहतोड़ उत्तर दिया। 16 बिहार रेजीमेंट के 20 सैनिक शहीद हो गए जिनमें कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल संतोष बाबू भी शामिल थे।
 इन 20 वीरों में 23 वर्ष के सैनिक गुरतेज सिंह का भी है। पंजाब ने अपने चार नौजवानों को देश के नाम बलिदान कर दिया है । 15 जून की घटना में 16 बिहार, 3 पंजाब रेजीमेंट, दो आर्टिलरी यूनिट और तीन मीडियम रेजीमेंट के अलावा 81 फील्‍ड रेजीमेंट चीन को उत्तर देने में शामिल थी।
परिवार में थी बड़े भाई की शादी —-
गुरतेज 3 पंजाब घातक प्‍लाटून के सिपाही थे। पंजाब के मानसा गांव के वीरे वाला डोकरा के रहने वाले गुरतेज जिस दिन बलिदान हुए उसी दिन गांव में उनके बड़े भाई गुरप्रीत के विवाह की रस्मे चल रही थी। भाई को सेना अधिकारियों की तरफ से जश्‍न के दौरान ही लाडले छोटे भाई के बलिदान होने की सूचना दी गई थी। गुरतेज बॉर्डर पर टेंशन और कोरोना वायरस महामारी के चलते वह भाई के विवाह में नहीं जा सके।
‘बोले सो निहाल’ के साथ टूट पड़े दुश्‍मन पर —
3 पंजाब घातक प्‍लाटून को रिइनफोर्समेंट के लिए बुलाया गया था। सैनिकों के पास उनके धर्म से जुड़ी कृपाण और डंडे, छड़ें और तेज चाकू ही थीं। सिपाही गुरतेज पर पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के चार सैनिकों ने हमला बोला। गुरतेज जरा भी डरे नहीं बल्कि रेजीमेंट का युद्धघोष ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल,’ का जयकारा लगाते  हुए उनकी तरफ बढ़े। गुरतेज ने दो को वहीं ढेर कर दिया जबकि दो ने उन्‍हें जान से मारने की कोशिश। गुरतेज चारों को पहाड़ी पर खींच कर ले गए और यहां से उन्‍हें नीचे गिरा दिया। गुरतेज भी अपना नियंत्रण खो दिया था और फिसल गए थे। लेकिन वह एक बड़े पत्‍थर की वजह से अटक गए और उनकी जान बच गई।
एक अकेले गुरतेज सवा लाख के बराबर—
सिपाही गुरतेज की गर्दन और सिर पर गहरी चोटें आ गई थीं। उन्‍होंने अपनी पगड़ी को दोबारा बांधा और फिर से लड़ाई के लिए आगे बढ़ चले।  उन्‍होंने चीनी जवानों का मुकाबला अपनी कृपाण से किया और एक चीनी सैनिक से उसका तेज हथियार भी छीन लिया। इसके बाद गुरतेज ने सात और चीनी जवानों को ढेर किया। अब तक गुरतेज 11 चीनी जवानों को ढेर कर चुके है। देह छोड़ने से पूर्व गुरतेज ने अपनी कृपाण से 12वें चीनी सैनिक को भी ढेर किया। गुरतेज अकेले लड़े लेकिन कहते हैं न कि एक-एक गुरु का सिख सवा लाख के बराबर होते हैं, गुरतेज ने इसी बात को सिद्ध कर दिया।
दिसंबर 2018 में शामिल हुए थे आर्मी में —
19 जून 2020 को पंजाब घातक प्‍लाटून उनके शव के साथ गांव पहुंची और यहां पर पूरे सैनिक सम्‍मान के साथ उनका अंतिम संस्‍कार किया गया। गुरतेज अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उन्‍होंने अपनी आखिरी कॉल में कहा था, ‘मैं जल्‍द घर आऊंगा।’ वह अपने घर तो लौटे मगर तिरंगे में लिपटे हुए। 
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